नियमों के उल्लंघन पर धार का 'श्री लीलादेवी हॉस्पिटल' तत्काल प्रभाव से सील, पंजीयन एवं अनुज्ञापन निरस्त
निरीक्षण में निलंबित लाइसेंस पर संचालित पाया गया था अस्पताल, भर्ती थे मरीज
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से 'कंसेंट टू ऑपरेट' (CTO) न लेने और नोटिस का जवाब न देने पर सीएमएचओ ने की सख्त कार्यवाही
धार जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा अवैध व नियम विरुद्ध संचालित चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए धार शहर के मांडव रोड स्थित 'श्री लीलादेवी हॉस्पिटल' का पंजीयन एवं अनुज्ञापन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) जिला धार द्वारा इस संबंध में विधिवत आदेश जारी कर दिए गए हैं। आदेश के तहत अब अस्पताल में किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सेवाओं का संचालन पूर्णतः अवैधानिक माना जाएगा।
बार-बार दिए गए निर्देशों की अवहेलना किए जाने पर की कार्यवाही
जारी आदेश के अनुसार, श्री लीलादेवी हॉस्पिटल (पता: 24, 25, 26 बालाजी नगर, मांडव रोड, धार) को मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 के अंतर्गत आवश्यक 'Consent to Operate' (CTO) प्राप्त कर कार्यालय में प्रस्तुत करने हेतु बार-बार निर्देशित किया गया था। इसके लिए विभाग द्वारा पूर्व में कई स्मरण पत्र और कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा आज दिनांक तक न तो वैध CTO प्रस्तुत किया गया और न ही नोटिस का कोई संतोषजनक जवाब दिया गया।
निलंबित लाइसेंस पर चल रहा था अस्पताल
बीते 21 अप्रैल 2026 को स्वास्थ्य विभाग की टीम (प्रस्तुतकर्ता डॉ. नरेन्द्र पवैया) द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में एक और गंभीर लापरवाही सामने आई थी। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि उक्त संस्थान निलंबित लाइसेंस की स्थिति में भी धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा था और अस्पताल में मरीज भर्ती पाए गए थे। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय कार्यालय, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, इंदौर द्वारा भी इस संस्थान का पंजीयन निरस्त करने हेतु अनुशंसा की गई थी।
उल्लंघन पर होगी एफआईआर
सीएमएचओ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा म.प्र. उपचर्यागृह एवं रूजोपचार संबंधी स्थापनायें (रजिस्ट्रीकरण एवं अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 एवं नियम 1997 (यथा संशोधित नियम 2021) का निरंतर उल्लंघन किया जा रहा था।
आदेश प्राप्त होते ही प्रबंधन को तत्काल समस्त चिकित्सीय गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि इस आदेश का उल्लंघन कर अस्पताल का संचालन जारी पाया जाता है, तो नर्सिंग होम अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक विधिक प्रावधानों के अंतर्गत पृथक से दंडात्मक व वैधानिक कार्यवाही (एफआईआर) की जाएगी।
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