721 वर्ष पश्चात शुक्रवार को हिन्दू समाज स्वाभिमान और सम्मान के साथ भोजशाला में मां का पूजन और महाआरती करेगा
-ज्ञानेंद्र त्रिपाठी
धार।भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने पत्रकार वार्ता में बताया कि 721 वर्ष पश्चात 22 मई शुक्रवार को हिन्दू समाज स्वाभिमान और सम्मान के साथ भोजशाला में मां का पूजन और महाआरती करेगा । दोपहर 12:00 बजे धान मंडी चौराहे से सकल हिंदू समाज सामूहिक रुप से मंदिर की ओर प्रस्थान कर दोपहर 1 बजे भोजशाला के अंदर महाआरती करेंगे। इस अवसर पर भोजशाला आंदोलन से जुड़े दीपक बिड़कर, सोनू गायकवाड, घनश्याम शर्मा केेे साथ 2003 मेंं गोलीकांड के दौरान घायल हुए धर्मेंद्र शर्मा एवं कैलाश यादव भी मौजूद रहे।
पत्रकार वार्ता अशोक जैन ने कहा कि हम सभी जानते हैं राजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती मंदिर भोजशाला को जब मुगल आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी ने 1305 में इस पर अवैध कब्जा कर इसे अपवित्र कर दिया था ।तभी से इस मंदिर में हिन्दू समाज यहां पूजन अर्चन करने लिए संघर्ष कर रहा था । समय-समय पर अनेको महापुरुषों ने अपने स्तर पर इसकी मुक्ति के प्रयास किए और इस संकल्प को जीवित रखा की हम एक दिन हमारी मां के मंदिर को इन जिहादियों से मुक्त कराएंगे। 1997 में जब भोजशाला की मुक्ति और उसके गौरव की पुनर्स्थापना का संकल्प लेकर हिन्दू समाज के स्वाभिमानी आंदोलनकर्ताओं ने एक अभियान प्रारंभ किया था जिसकी अंतिम मुहर 15 मई 2026 शुक्रवार को उच्च न्यायालय इंदौर ने लगा दी। यह संयोग ही था कि अंतिम मुहर भी शुक्रवार को लगी , इसका अर्थ है मां सरस्वती की की भी यही इच्छा है माता ने ही स्वयं घोषित कर दिया यह पूर्ण रुप से मंदिर है , नमाज का कोई अधिकार नहीं है यह घोषित कर दिया। इस निर्णय से बहुत सारे परिवर्तन हुए , पुरातत्व विभाग ने अब नया नामकरण कर दिया भोजशाला के रूप में , कमाल मौला मस्जिद हट चुका है , इन परिवर्तन के अलावा एक महत्वपूर्ण परिवर्तन और हुआ जिस पर सबका ध्यान जाना चाहिए , विगत 721 वर्षों में पहली बार यह शुक्रवार जो 22 मई को आने वाला है वह ऐतिहासिक रहेगा क्योंकि इस शुक्रवार को हिन्दू समाज को भोजशाला में आधिकार पूर्वक पूर्ण स्वाभिमान और सम्मान के साथ पूजन अर्चन करने का अवसर मिलने वाला है क्योंकि इसके पहले तो प्रति शुक्रवार हिन्दू समाज को मंदिर में प्रवेश का अधिकार ही था , और जब जब शुक्रवार को बसंत पंचमी आती थी तो हिन्दू समाज अपमानित होकर , मारपीट कर , वहां से भगा दिया जाता था और वहां नमाज पढ़ाई जाती थी । मुगलों और अंग्रेजों के समय तो यह होता ही था परंतु आजादी के पश्चात से आज तक यह कृत्य जारी था। इस अवसर पर 22 मई को शुक्रवार के दिन यदि कोई न्यायालयीन अड़चन नहीं आती है तो हिन्दू समाज पुर्ण स्वाभिमान और सम्मान के साथ भोजशाला में दोपहर 1 बजे मां का पुजन अर्चन और महाआरती करेगा । क्योंकि अभी तक जो ह्रदय में टिस रहती थी हिन्दू समाज के अपमान की वह टीस इसी से समाप्त होने वाली है कि वहां हिंदू समाज निर्बाध रूप से स्वाभिमान और सम्मान के साथ अधिकार पूर्वक पूजन अर्चन करके मां की आराधना करेगा।*यह आंदोलन "मै" का नहीं,हम सकल हिंदू समाज के स्वाभिमान का था*