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हनुमान जयंती पर सांची दूध की नहीं हुई आपूर्ति, दूध की भारी किल्लत,उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश

हनुमान जयंती पर सांची दूध की नहीं हुई आपूर्ति, दूध की भारी किल्लत,उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश

ज्ञानेंद्र त्रिपाठी 
​धार |आज हनुमान जयंती के पावन पर्व पर धार जिले के उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिले में सांची दूध की आपूर्ति पूरी तरह ठप रही, जिसके कारण सुबह से ही दूध के बूथों और पार्लरों पर अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। त्यौहार के दिन दूध का एक पैकेट भी उपलब्ध न होने से आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। बताया जा रहा है कि कोरोना जैसी महामारी के दौरान भी आपूर्ति बंद नहीं की गई थी ऐसे में आज यह आपूर्ति नहीं होना कई कारणो को जन्म दे रहा है।
​त्यौहार पर बढ़ा संकट-
​हनुमान जयंती के अवसर पर घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और प्रसादी का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूध की खपत बढ़ जाती है। सांची दूध, जो जिले की लाइफलाइन माना जाता है, उसकी अनुपलब्धता ने त्यौहार की तैयारियों में खलल डाल दिया। उपभोक्ताओं को मजबूरी में निजी डेयरियों और ऊंचे दामों पर बिकने वाले खुले दूध का सहारा लेना पड़ा।
​अधिकारियों की मिलीभगत का अंदेशा-
​इस संकट को लेकर स्थानीय उपभोक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। जिले के कई प्रबुद्ध नागरिकों और उपभोक्ताओं का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी खराबी या सप्लाई चेन की समस्या नहीं है।
स्थानीय उपभोक्ता की आशंका-
​"हमें अंदेशा है कि सांची के स्थानीय अधिकारियों की अन्य प्रांतों की निजी दूध कंपनियों के साथ मिलीभगत है। जानबूझकर सरकारी सप्लाई को रोककर बाहरी ब्रांड्स को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि वे अपना बाजार बना सकें।" — स्थानीय उपभोक्ता
​प्रमुख बिंदु और जनता की मांग-
​सप्लाई ठप: जिले के अधिकांश बूथों पर सुबह से 'स्टॉक खत्म' के बोर्ड लटके रहे।
​आर्थिक बोझ: सांची दूध न मिलने से लोगों को अन्य महंगे विकल्पों पर पैसा खर्च करना पड़ा।
​जांच की मांग: आक्रोशित जनता ने जिला प्रशासन से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
​प्रशासनिक चुप्पी: इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल सांची दुग्ध संघ के अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। त्यौहार के दिन हुई इस अव्यवस्था ने विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आपूर्ति सुचारू नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
जिम्मेदार फोन उठाने को तैयार नहीं -
इस संबंध में जिम्मेदारों को फोन लगाए गए तो वह फोन उठाने को तैयार नहीं इसलिए आधिकारिक रूप से वास्तविक कारण ज्ञात नहीं हो पा रहा है।

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